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मन की शांति का एकमात्र उपाय?


मन में शांति ना हो तो मनुष्य परेशान रहता है फिर वजह चाहे जो भी हो। मन की शांति के लिए लोग अनेक प्रकार के जतन भी करते हैं और कुछ हद तक परेशानी को काबू करने में कामियाब भी होते हैं बावजूद इसके उन्हें पूरी तरह मन की शांति नहीं मिलती।

मन की शांति के लिए कोई सिगरेट पिता है तो कोई शराब पीता है यहां तक कि कोई माला जप्ता है तो कोई योगासन द्वारा ध्यान लगाता है। मन की शांति की जैसी चाहत मनुष्य करता है उसकी पूर्ति के उपाय भी कर गुज़रता है। कुछ को शांति और संतुष्टि मिल जाती है बाकी शांति की खोज में लगे रहते हैं। सुबह होती है शाम होती है लेकिन मन व्याकुल और अशांत ही रह जाता है?

मनुष्य बचपन से निकल कर लड़कपन और फिर जवानी की दहलीज पर कदम रखता है। उसके मन में नित नए ख्यालात का जन्म लेना स्वाभाविक है। उम्र के इसी पड़ाव पर विपरीत लिंग का आकर्षण सबसे ज़्यादा प्रभावित करता है जिसकी चकाचौंध और जिज्ञासा के भंवर से खुद को बाहर नहीं निकाल पाता। आखिर विपरीत लिंग का यह आकर्षण क्या है जो रातों की नींद तक हराम कर देता है? कभी आपने गौर किया है कि आखिर मन में लगी आग कैसे शांत होगी? क्या है जिससे मन को शांति प्राप्त हो? ईश्वर ने मन की शांति का सरल और सहज उपाय बना रखा है यह और बात है कि मनुष्य मन की शांति के उपाय अपने तरीके से तलाश करने में लगा है और माथा पच्ची कर रहा है।

विपरीत लिंग का आकर्षण ही मन की शांति का द्वार है। धर्म, समाज और कानून जिस रिश्ते को मान्यता देते हैं वही मन की शांति का मुख्य स्रोत है। बात अटपटी लगती है और लगनी भी चाहिए मगर सोचिए उस मनमोहक मुस्कान और हंसी की जिसको देख और सुनकर आपकी सारी थकान और परेशानी पल भर में गायब हो जाए। हर दिन सुहाना और रातें रंगीन लगें? बड़ा ही बदनसीब है वह जिसकी मन की शांति का साधन मौजूद हो और उसका मन अशांत रहे।

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